मेले में क्या करेंगे मुस्लिम? महाराष्ट्र में गांव के सरपंच के एक आदेश पर मचा बवाल
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मेले में क्या करेंगे मुस्लिम? महाराष्ट्र में गांव के सरपंच के एक आदेश पर मचा बवाल

Village Resolution: ग्राम पंचायत के सरपंच ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यात्रा के दौरान गांव में शोक का माहौल रहता है. इस दौरान लोग तली भुनी चीजें नहीं खाते बाल कटवाना तक बंद कर देते हैं और शादियां भी नहीं करते. उनका कहना है कि मुस्लिम व्यापारी इन परंपराओं का पालन नहीं करते.

मेले में क्या करेंगे मुस्लिम? महाराष्ट्र में गांव के सरपंच के एक आदेश पर मचा बवाल

Maharashtra Village Ban: महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के माढ़ी गांव की ग्राम पंचायत ने 22 फरवरी को एक विवादित प्रस्ताव पारित किया जिसमें मुस्लिम व्यापारियों को वार्षिक ‘माढ़ीची यात्रा’ के दौरान कारोबार करने से रोकने का निर्णय लिया गया. यह यात्रा होली से शुरू होकर गुड़ी पड़वा तक चलती है और इसकी परंपरा करीब 700 साल पुरानी है. ग्राम पंचायत के इस फैसले के बाद स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. इस यात्रा को स्थानीय तौर पर एक मेले के रूप में भी मनाया जाता है.

बवाल पर प्रशासन ने दिए जांच के आदेश
मामले में अहिल्यानगर जिले के कलेक्टर सिद्धाराम सलिमथ ने बताया कि इस फैसले की जांच के लिए जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को निर्देश दिया गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके साथ ही खंड विकास अधिकारी शिवाजी कांबले से भी रिपोर्ट मांगी गई है. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.

फिर सरपंच ने क्या कहा..
ग्राम पंचायत के सरपंच संजय मरकड़ ने इस फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि यात्रा के दौरान गांव में शोक का माहौल रहता है. इस दौरान लोग तली भुनी चीजें नहीं खाते बाल कटवाना तक बंद कर देते हैं और शादियां भी नहीं करते. उनका कहना है कि मुस्लिम व्यापारी इन परंपराओं का पालन नहीं करते. इसलिए उन्हें यात्रा में दुकानें लगाने की अनुमति नहीं दी गई.

मंत्री ने संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए जिले के संरक्षक मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि ग्राम सभा को संविधानिक अधिकार प्राप्त हैं और वह अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है. हालांकि उन्होंने जिला प्रशासन से दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकालने की अपील की.

राजनीति गरमाई, हल निकालने की मांग
इस फैसले से राजनीतिक माहौल भी गरम हो गया है. राज्य के मंत्री नितेश राणे गांव का दौरा करने वाले हैं ताकि लोगों से बातचीत कर विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा सके. प्रशासन भी दोनों पक्षों से बातचीत कर मामले को शांति से सुलझाने का प्रयास कर रहा है.

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