Egypt Summit: ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वह इस योजना को “रियल एस्टेट डील” के रूप में देखते हैं और इसे एक बड़ा निवेश मानते हैं. इस बयान से मुस्लिम देश भड़क गए हैं और अमेरिका व इजरायल के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं.
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Egypt Summit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में गाजा को लेकर विवादित बयान दिया था, जिसके बाद मध्य पूर्व की सियासत गरमा गई है. अरब देश ट्रंप के बयान की निंदा कर रहे हैं. इस बीच मिस्र ने ऐलान किया है कि वह इस मामले को लेकर 27 फरवरी को एक आपातकालीन अरब शिखर सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है. इसकी मेजबानी वह खुद करेगा.
मिस्र ने क्या कहा?
मिस्र ने कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गाजा पट्टी से फलस्तीनियों को कहीं और बसाने के प्रस्ताव के बाद “नए और खतरनाक घटनाक्रम” पर चर्चा की जाएगी. पिछले सप्ताह इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्हाइट हाउस में हुई बैठक में ट्रंप द्वारा दिए गए सुझाव से मिस्र, जॉर्डन और सऊदी अरब सहित अरब जगत नाराज हो गया, जो अमेरिका के प्रमुख सहयोगी हैं.
मिस्र और जॉर्डन दिखा चुके हैं लाल आंख
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय दोनों ने गाजा में 18 लाख फलस्तीनियों को कहीं और बसाने और अमेरिका द्वारा उस क्षेत्र का स्वामित्व लेने के ट्रंप के आह्वान को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप का दावा है कि वे आखिर में इसे स्वीकार कर लेंगे.
मिस्र के विदेश मंत्री ने क्या कहा?
मिस्र के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह हाल के दिनों में अरब देशों में उच्चतम स्तर पर हुई वार्ता के बाद काहिरा में अरब लीग शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें “फलस्तीन राज्य भी शामिल है, जिसने फलस्तीनी मुद्दे के लिए नए और खतरनाक घटनाक्रमों पर चर्चा करने के लिए शिखर सम्मेलन आयोजित करने की गुजारिश की थी.”
ट्रंप ने क्या कहा था?
ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि वह इस योजना को “रियल एस्टेट डील” के रूप में देखते हैं और इसे एक बड़ा निवेश मानते हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह इस पर जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेंगे. इसके अलावा, इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने सुझाव दिया था कि सऊदी अरब के पास फिलिस्तीनी राज्य के लिए पर्याप्त भूमि है. हालांकि, उनकी यह टिप्पणी पूरे क्षेत्र में विवाद का कारण बनी और कई देशों ने इसकी निंदा की.
इजरायल के दोस्त क्यों है परेशान
गौरतलब है कि मिस्र और जॉर्डन को इजरायल का करीबी माना जाता है. जब ईरान ने इजरायल पर हमला किया था, उस समय अमेरिका के साथ जॉर्डन ने भी ईरानी मिसाइलों को मार गिराने के लिए अपनी वायु सेना को सक्रिय कर दिया था और दावा किया था कि उसने कई ईरानी मिसाइलों को मार गिराया है. वहीं, मिस्र ने ईरानी हमले की निंदा की थी.