mp news-पीथमपुर में जहरीले कचरे को जलाने के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट में रामकी फैक्ट्री में कंटेनर खाली करने का आदेश दिया, इसको लेकर सीएम मोहन यादव ने हाईकोर्ट का आभार जताया.
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madhya pradesh news-यूनियन कार्बाइड का जहरीला कचरा पीथमपुर में जलाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई. सुनवाई में पीथमपुर में कंटेनर खाली करने की अनुमित को बरकरार रखा है. दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस कैत ने कचरा खाली करने की अनुमति देते हुए अगली तारीख दे दी है. 18 जनवरी को अब इस मामले में दोबार सुनवाई होगी.
इसको लेकर सीएम मोहन यादव ने जबलपुर हाईकोर्ट का आभार जताया है.
सरकार ने मांगा समय
हाईकोर्ट में सरकार की तरफ से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि यूनियन कार्बाई का रासायनिक कचरा वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाए. कोर्ट के आदेश के अनुसार सरकार ने ग्रीम कॉरिडोर बनाकर पुलिस, डॉक्टर और शिक्षित लोगों की टीम के जरिए इसे कंटेनरों में पैक किया और पीथमपुर ले गए। इससे पहले कि इस रासायनिक कचरे को नष्ट किया जाता, पीथमपुर के आसपास जनता ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की. राज्य सरकार पीथमपुर में जनता को शांत करने और समझाने के लिए 6 सप्ताह का समय चाहती है.
क्या बोले सीएम
यूनियन कार्बाइड के कचरे को लेकर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई को लेकर सीएम मोहन कहा कि न्यायालय का आदेश हमारी आशा के अनुसार आया है. न्यायालय के आदेश पर ही हमने यूनियन कार्बाइड का कचरा भोपाल से पीथमपुर भेजा था. सभी पक्षों को न्यायालय में अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए, सभी अपना पक्ष रखे. न्यायालय ने भी इस बात को माना है और 6 हफ्ते का समय दिया है. न्यायालय सभी पक्षों को सुनेगा उसके बाद आगे निर्णय लेगा. सरकार की मंशा को समझने के लिए न्यायालय का धन्यवाद और सरकार को समय भी मिला है. आगे भी न्यायालय के निर्णय पर ही फैसला लिया जाएगा
संगठन ने की याचिका दायर
इंदौर की एमजीएम एलुमिनाई एसोसिएशन ने 28 दिसंबर को दायर की थी. इदौर खंडपीठ से इसे जबलपुर खंडपीठ में ट्रांसफर किया गया है.याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिनव धनोदकर का कहना है कि सरकार ने इंदौर और पीथमपुर की जनता को भरोसे में लिए बिना यह एकतरफा कदम उठाया है. इंदौर से पीथमपुर की सिर्फ 30 किलोमीटर दूर है. ऐसे में अगर 358 मीट्रिक टन जहरीला कचरा यहां रखा जाता है तो यह दोनों शहरों की जनता के लिए हानिकारक साबित होगा. इसे वापस भोपाल ले जाना चाहिए.