अवध का रसिया नवाब; बचपन में हुई जबरदस्ती...धीरे-धीरे बढ़ा अफ्रीकी महिलाओं का शौक, हर दिन करने लगा शादी

Awadh last Nawab wazid ali shah: नवाब विदेशी व्यापारियों के साथ जो अफ्रीकी महिला गुलाम आती थीं, उनपर दिल हार बैठते थे. साथ ही उन्हें अपना अंगरक्षक भी बना लेते थे. कहा जाता है कि उनके जीवन का एक दौर ऐसा था, जब वह हर रोज एक शादी करते थे.

Written by - Nitin Arora | Last Updated : Feb 25, 2025, 06:53 PM IST
अवध का रसिया नवाब; बचपन में हुई जबरदस्ती...धीरे-धीरे बढ़ा अफ्रीकी महिलाओं का शौक, हर दिन करने लगा शादी

Nawab wazid ali shah: ऐसा कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि नवाब तो अपने शौक के लिए ही जाने जाते हैं. तो अवध के आखिरी नवाब वाजिद अली शाह कैसे पीछे रह जाते. इनके किस्से क्या कहें, इनके तो अंगरक्षक भी मर्द नहीं महिलाएं होती थीं. वो भी ये विदेशी व्यापारियों के जरिए बुलाते थे. अवध नवाब अफ्रीकी महिला अंगरक्षकों को अपने आसपास रखते थे.

बताया जाता है कि वाजिद अली शाह ने अपने अंतकाल में 375 महिलाओं से शादी की थी. नवाब साहब बेहद रंगीन मिजाज के थे. उनका ज्यादातर समय हिजड़ों, हसीन लड़कियों के बीच गुजरता था. उस दौरान राजाओं और नवाबों को जहां गोरी चमड़ी वाली अंग्रेज महिलाएं पसंद आती थीं, वहीं वाजिद अली को काले रंग की महिलाएं पर फिदा रहते थे.

दरअसल, नवाब विदेशी व्यापारियों के साथ जो अफ्रीकी महिला गुलाम आती थीं, उनपर दिल हार बैठते थे. साथ ही उन्हें अपना अंगरक्षक भी बना लेते थे. कहा जाता है कि उनके जीवन का एक दौर ऐसा था, जब वह हर रोज एक शादी करते थे.

खूबी की बात करें वाजिद अली शाह ऐसे नवाब हुए जिनका नृत्य कला और संगीत व अन्य क्षेत्रों में गजब का योगदान रहा.

8 साल में हुई जबरदस्ती
बचपन में नवाब के साथ अधेड़ सेविका ने जबरदस्ती संबंध बना लिए थे. तब नवाब की उम्र केवल 8 साल थी. ये सिलसिला दो साल चलता रहा, जहां उसे निकाल दिया गया तो उसके बाद आई दूसरी सेविका अमीरन नाम की आई से भी वाजिद के छोटी उम्र में संबंध बने.

औरंगजेब, अवध नवाब और अंग्रेज
दरअसल, मुगल बादशाह औरंगजेब जब मर गया तो तब देश में तीन मुख्य राज्य उभरे. उनमें अवध एक था. हालांकि, 130 सालों के इसके लंबे अस्तित्व के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने इस पर कब्जा कर लिया. जहां अंग्रेजों ने जब कब्जा किया तो वाजिद अली शाह को कोलकाता जाना पड़ा.

बता दें कि कोलकाता जाने के बाद अंतकाल में नवाब ने खूब शादियां कीं. साथ ही जब वह लखनऊ से कोलकाता गया तो अपनी कई अस्थाई बीवियों और स्थाई बीवियों को छोड़ गया. इतनी शादियों के पीछे उनके वंशज कहते हैं, 'बादशाह इतना पवित्र था कि वह अपनी सेवा करने के लिए किसी स्त्री को तब तक अनुमति नहीं देता था जब तक कि उससे अस्थायी शादी ना कर ले.' बता दें कि अंत में वाजिद अली के पास धन खत्म होने लगा. जहां 21 सितंबर 1887 में उनकी मृत्यु हो गई. बताया जाता है उनकी शवयात्रा में हजारों लोग शामिल हुए.

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