F-35 फाइटर जेट को लेकर दुविधा क्यों? ट्रंप के ऑफर के बाद क्या सोच रहा भारत, जानें

F-35 Deal news: एफ-35 की पेशकश ने भारत के लिए एक कठिन निर्णय लेने को मजबूर कर दिया है. सवाल ये है कि क्या भारत को अपनी वायुसेना को तत्काल मजबूत करने के लिए महंगे विदेशी लड़ाकू विमान में निवेश करना चाहिए या दीर्घकालिक लाभ के लिए घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देनी चाहिए?

Written by - Nitin Arora | Last Updated : Feb 27, 2025, 06:29 PM IST
F-35 फाइटर जेट को लेकर दुविधा क्यों? ट्रंप के ऑफर के बाद क्या सोच रहा भारत, जानें

India's Fighter Jet Dilemma: अमेरिका ने भारत को अपने सबसे उन्नत लड़ाकू विमान F-35 की पेशकश की है. इसे एक बड़े सैन्य बिक्री विस्तार के रूप में देखा जा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि यह सौदा 'कई अरबों डॉलर' का हो सकता है और यह भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है.

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्ताव के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने साफ कर दिया है कि फिलहाल भारत द्वारा अमेरिका से एफ-35 लड़ाकू विमानों की डील पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है. मिस्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, 'प्लेटफॉर्म के अधिग्रहण के लिए एक विशिष्ट प्रक्रिया का पालन किया जाना है. आमतौर पर, प्रस्तावों के लिए अनुरोध जारी किया जाता है, उसके बाद जवाबों का मूल्यांकन किया जाता है. अभी तक भारत द्वारा उन्नत विमानन प्लेटफॉर्म के अधिग्रहण के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है.'

उन्होंने कहा, 'यह अभी भी प्रस्ताव के स्तर पर है और मुझे नहीं लगता कि कोई औपचारिक प्रक्रिया शुरू हुई है.' इस बीच, डील के संभावित अधिग्रहण के साथ ही भारत के स्वदेशी लड़ाकू जेट प्रोग्राम और आगे की रणनीतिक प्राथमिकताओं के बारे में सवाल उठता है.

बता दें कि भारत अपनी वायु सेना को आधुनिक बनाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहा है. खासकर तब जब चीन और पाकिस्तान के साथ क्षेत्रीय तनाव पिछले काफी समय में बहुत बढ़ चुका है.

लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II, पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर, उपलब्ध सबसे उन्नत विमानों में से एक है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक है जो हवाई श्रेष्ठता को बढ़ाती है.

खर्चा कितना आएगा?
भारत की जरूरतों के लिए सबसे उपयुक्त वैरिएंट 110 F-35A जेट की अनुमानित लागत लगभग 12.1 बिलियन अमरीकी डॉलर है. हालांकि, 40 वर्षों में कुल लाइफ साइकिल कोस्ट (LCC) रखरखाव, संचालन और उन्नयन सहित लगभग 100 बिलियन अमरीकी डॉलर हो सकती है.

ध्यान देने वाली बात ये है कि F-35 का परिचालन खर्च विशेष रूप से अधिक है. प्रत्येक जेट की अनुमानित लागत प्रति उड़ान घंटे 30,000 अमरीकी डॉलर है.

स्वदेशी लड़ाकू विमान विकास: AMCA
इसके विपरीत, भारत अपना खुद का स्टील्थ लड़ाकू विमान, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) विकसित कर रहा है, जो हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) द्वारा संचालित एक कार्यक्रम है. AMCA को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के रूप में देखा जा रहा है, जिसके बाद के संस्करणों में छठी पीढ़ी की तकनीकें होंगी.

इस परियोजना को हाल ही में सरकार से 15,000 करोड़ रुपये (USD 1.8 बिलियन) का फंड मिला है, जिसका लक्ष्य 2027-2028 तक प्रोटोटाइप तैयार करना है, जिसका पूर्ण पैमाने पर उत्पादन 2035 तक होने की उम्मीद है.

हालांकि, विशेषज्ञ बताते हैं कि यह समय सीमा आगे बढ़ सकती है, क्योंकि तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) भी देने में कंपनी ने काफी देर कर दी थी तो इसे देखते हुए AMCA की समयसीमा 2038-2040 तक खिसक सकती है, जिससे क्षमता में महत्वपूर्ण अंतर आएगा.

भारत के लिए दुविधा
F-35 की पेशकश भारत के लिए एक कठिन निर्णय है. लेकिन सवाल ये कि क्या भारत को अपनी वायु सेना को तुरंत मजबूत करने के लिए एक महंगे विदेशी लड़ाकू विमान में निवेश करना चाहिए या फ्यूचर और लंबे लाभ के साथ घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता देनी चाहिए?

विशेषज्ञों का तर्क है कि F-35 के लिए प्रतिबद्ध होना भारत के स्वदेशी लड़ाकू कार्यक्रम को कमजोर कर सकता है. अमेरिकी जेट पर 100 बिलियन अमरीकी डॉलर खर्च करना और साथ ही AMCA को विकसित करने की कोशिश करना भारत की रक्षा प्राथमिकताओं के बारे में मिश्रित संकेत देता है.

क्या भारत F-35 खरीदेगा?
F-35 के शामिल होते ही भारत की हवाई क्षमताएं तत्काल मजबूत हो जाएंगी, लेकिन इसके अधिग्रहण के साथ कुछ शर्तें भी जुड़ी हैं. भारत को अमेरिकी सेना के समान अनुकूल मूल्य निर्धारण की आवश्यकता होगी और अपने स्वयं के सैन्य पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने के लिए स्टील्थ तकनीक तक पहुंच की आवश्यकता होगी. जेट इंजन के सह-उत्पादन पर पिछले कूटनीतिक बाधाओं को देखते हुए, ऐसी तकनीक प्राप्त करने में वर्षों लग सकते हैं.

फिलहाल, भारतीय वायु सेना (IAF) को लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जो कि गंभीर बात है. बता दें कि आवश्यक 42 के बजाय केवल 31 परिचालन स्क्वाड्रन हैं. F-35 अस्थायी रूप से इस कमी को पूरा कर सकता है, लेकिन भारत को अंतिम निर्णय क्या होगा, इसपर सबका ध्यान है.

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