नई दिल्ली: भारत अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने के लिए हर दिन नए कदम उठा रहा है. ऐसे में दुनियाभर के देशों से भारत कई आधुनिक हथियार खरीद रहा है. इसी कड़ी में अमेरिका सिगसोर-716 (Sig Sauer-716) और भारत-रूस द्वारा बनाई जा रही AK-203 जैसी असॉल्ट राइफल्स खासतौर पर चर्चा में हैं. दोनों ही राइफल्स 7.62mm कैलिबर की गोलियों का इस्तेमाल करती हैं, इसके बावजूद इनके डिजाइन, उपयोग करने के तरीके और रणनीतिक में काफी अंतर हैं. आइए इन दोनों की विशेषताओं और भारतीय सेना में इनके स्थान की तुलना करें.
विशेषताएं
सबसे पहले अगर हम सिगसोर 716 और एके 203 की तनकनीकी विशेषताओं पर बात करें तो दोनों ही राइफल्स अपने आप में बहुत खास और अलग भी हैं.
Sig Sauer-716: भारत वर्ष 2019 में 72 से ज्यादा सिगसोर असॉल्ट राइफल्स पहले ही खरीद चुका है. यह ऑटोमैटिक असॉल्ट राइफल है. इसके बैरल यानी नली की लंबाई 16 इंच (लगभग 406 मिमी) है. वहीं, इस राइफल का कुल वजन लगभग 3.9 किलोग्राम है. यह एक गैस ऑपरेटेड रोटेटिंग बोल्ट सिस्टम वाली राइफल है. इस राइफल में 7.62x51mm NATO की गोलियां लगाई जाती हैं, जो दूर बैठे दुश्मन का भी सीना छलनी कर दे. इसकी एक मैगजीन में 20 राउंड गोलियां आती हैं और यह हर मिनट में 685 राउंड फायरिंग कर सकती हैं. इसकी रेंज 600 मीटर यानी करीब 1970 फीट है.
AK-203: एके-203 के कैलिबर की बात करें तो इसमें 7.62x39mm का कैलिबर है. इसके बैरल यानी नली की लंबाई 415 मिमी है. इसका कुल वजन 3.8 किलोग्राम है. इसकी प्रभावी रेंज 300-400 मीटर होता है. वहीं, यह सेमी-ऑटोमैटिक और फुल-ऑटोमैटिक फाइरिंग मोड पर भी रह सकती है. सिगसोर राइफल की तरह एके-203 भी एक गैस ऑपरेटेड रोटेटिंग बोल्ट वाली राइफल है. इसकी मैगजीन क्षमता सिगसोर से काफी ज्यादा है. इसमें 30 राउंड्स गोलियां आती हैं.
रिकॉइल और हैंडलिंग
Sig-716: इसका रिकॉइल AK-203 से अधिक है, क्योंकि यह बड़े और भारी गोला-बारूद का उपयोग करता है। यह इसे कम अनुभवी सैनिकों के लिए थोड़ा मुश्किल बना सकता है, लेकिन इसकी सटीकता लंबी दूरी पर बेजोड़ है।
AK-203: इसका रिकॉइल कम है और यह तेज़ी से लगातार फायरिंग के लिए बेहतर है। AK सीरीज़ की यह खासियत इसे विभिन्न परिस्थितियों में भरोसेमंद बनाती है।
रखरखाव
सिगसोर-716 एक आधुनिक डिजाइन में अच्छी सामग्री से बनाई गई है. हालांकि, इसके डायरेक्ट इम्पिंजमेंट सिस्टम को नियमित रखरखाव की जरूरत रहती है. खासतौर पर धूल और गंदगी वाले इलाकों में इसक खास ख्याल भी रखना पड़ता है. दूसरी ओर AK-203 अपनी मजबूती और कम रखरखाव के लिए जानी जाती हैं. यह राइफल रेत, कीचड़, और ठंड जैसे मुश्किल हालातों में भी बिना रुकावट या परेशानी के काम करती है.
भारतीय सेना में उपयोगिता
सिगसोर को मुख्य रूप से सीमा पर तैनात सैनिकों और आतंकवाद के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियानों के लिए खरीदा गया है. इसकी लंबी रेंज और शक्ति इसे LAC (चीन के साथ) और LoC (पाकिस्तान के साथ) जैसे इलाकों के लिए प्रभावी बनाती है. वहीं, AK-203 को INSAS राइफल्स की जगह पर डिजाइन किया गया है. इसे बनाने का उद्देश्य सामान्य पैदल सेना को एक विश्वसनीय हथियार देना है.
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