यहां फिर बढ़ रहा 'बच्चा-बाजी' का कहर, मासूम लड़के बन रहे गुलाम..हालत बदतर
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यहां फिर बढ़ रहा 'बच्चा-बाजी' का कहर, मासूम लड़के बन रहे गुलाम..हालत बदतर

Bacha Bazi: यूरोपीय यूनियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अफगान सुरक्षा बल और लोकल पुलिस हर प्रांत में लड़कों को इस काम के लिए भर्ती करते हैं. कई अफगानों खासकर धार्मिक समूहों में इसे सांस्कृतिक रूप से ठीक मानते हैं.

यहां फिर बढ़ रहा 'बच्चा-बाजी' का कहर, मासूम लड़के बन रहे गुलाम..हालत बदतर

Child Exploitaion: अफगानिस्तान में एक बेहद परेशान करने वाली प्रथा 'बच्चा-बाजी' फिर से जोर पकड़ रही है. इसमें छोटे-छोटे लड़कों को जो अक्सर नाबालिग होते हैं, अमीर अफगान पुरुषों के लिए नाचने पर मजबूर किया जाता है. ये लोग बाद में इन बच्चों का यौन शोषण भी करते हैं. गरीब परिवारों से आने वाले इन बच्चों को मेकअप करवाया जाता है और पार्टियों में परफॉर्म करने के लिए भेजा जाता है. कई बार उनके परिवार ही उन्हें बेच देते हैं.

सदियों पुरानी प्रथा, तालिबान के बाद फिर बढ़ी
असल में यह गंदी प्रथा 13वीं सदी से चली आ रही है और अलग-अलग शासनों के बाद भी खत्म नहीं हुई. 1990 के दशक में तालिबान ने अपनी पहली हुकूमत में इसे बैन किया था लेकिन 2001 में अमेरिका के आक्रमण के बाद यह फिर से फैल गया. 2021 में अमेरिका के जाने के बाद यह और भी आम हो गया है. खासकर पश्तून कबीलों के इलाकों में. वहां अनुमान है कि आधे पुरुष इसमें शामिल हैं.

बच्चों का दर्द.. शोषण और टूटते सपने
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने वहां के एक लड़के से बात की तो उसने कहा कि मुझे अपने मालिक से प्यार है. मुझे नाचना औरतों की तरह ऐक्ट करना और उनके साथ खेलना अच्छा लगता है. बड़ा होने पर मैं भी मालिक बनूंगा और मेरे अपने लड़के होंगे. यह दिखाता है कि कैसे बच्चों को शोषण के लिए तैयार किया जाता है. इस प्रथा से बच्चों को गहरी मानसिक और शारीरिक चोटें पहुंचती हैं जैसे अंदरूनी खून बहना, हड्डियां टूटना और कभी-कभी मौत भी. बड़े होने पर ये बच्चे समाज से बहिष्कृत हो जाते हैं और ड्रग्स या खुद शोषक बन जाते हैं.

कानून बना..  पर हालात नहीं बदले
हालांकि अफगानिस्तान में समलैंगिकता की सजा मौत है फिर भी 'बच्चा-बाजी' चल रही है. 2024 में यूरोपीय यूनियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अफगान सुरक्षा बल और लोकल पुलिस हर प्रांत में लड़कों को इस काम के लिए भर्ती करते हैं. कई अफगानों खासकर धार्मिक समूहों में इसे सांस्कृतिक रूप से ठीक मानते हैं. 2018 में इसे रोकने के लिए कानून बना लेकिन तालिबान के मौजूदा शासन में यह जारी है. तालिबान ने इसका फायदा उठाकर बच्चों को जासूसी और हमलों के लिए भी इस्तेमाल किया.

दुनिया की बेरुखी.. बच्चों की बर्बादी
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिकअफगानिस्तान में अमेरिकी फौजियों ने इसे देखा पर वे कुछ कर नहीं सके. एक सैनिक के पिता ने बताया कि उनका बेटा रात में बच्चों की चीखें सुनता था लेकिन उसे 'उनकी संस्कृति' कहकर अनदेखा करने को कहा गया. तालिबान के सख्त नियमों और महिलाओं पर पाबंदियों ने हालात और खराब कर दिए. अंतरराष्ट्रीय समुदाय के चले जाने से ये मासूम बच्चे बिना किसी सुरक्षा के शोषण का शिकार बन रहे हैं. यह अफगान समाज के एक हिस्से में गहरे जमी इस प्रथा को खत्म करने की नाकामी का सबूत है. सांकेतिक फोटो एआई

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