ब्रेन इंजरी के इलाज के लिए एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दी है. अमेरिका के मास जनरल ब्रिघमके शोधकर्ताओं ने एक ऐसा नाक में डालने वाला स्प्रे विकसित किया है, जो ब्रेन इंफ्लेमेशन (दिमाग में सूजन) को कम करने में कारगर साबित हो सकता है.
Trending Photos
ब्रेन इंजरी के इलाज के लिए एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दी है. अमेरिका के मास जनरल ब्रिघमके शोधकर्ताओं ने एक ऐसा नाक में डालने वाला स्प्रे विकसित किया है, जो ब्रेन इंफ्लेमेशन (दिमाग में सूजन) को कम करने में कारगर साबित हो सकता है. शोध के मुताबिक, यह स्प्रे न केवल दिमागी चोट से होने वाले नुकसान को कम करता है, बल्कि सेंट्रल नर्वस सिस्टम और व्यवहार से जुड़ी समस्याओं को भी ठीक करने में मददगार हो सकता है.
यह शोध अमेरिका के ब्रिघम एंड वीमन्स हॉस्पिटल (BWH) में इम्यूनोलॉजी ऑफ ब्रेन इंजरी प्रोग्राम के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट सैफ इज्जी के नेतृत्व में किया गया. उन्होंने बताया कि ब्रेन इंजरी के बाद दिमाग में होने वाली क्रोनिक इंफ्लेमेशन (लंबे समय तक बनी रहने वाली सूजन) के कारण मरीजों को मानसिक गिरावट और अन्य गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब तक इस स्थिति को रोकने या ठीक करने के लिए कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं था.
माइक्रोग्लियल सेल्स पर असर
शोधकर्ताओं ने चूहों पर इस स्प्रे का परीक्षण किया. उन्होंने बताया कि इस स्प्रे में मौजूद मोनोक्लोनल एंटीबॉडी फोरलुमैब इम्यून सेल्स और माइक्रोग्लियल सेल्स के बीच कम्युनिकेशन को प्रभावित करता है. इससे दिमाग में सूजन कम होती है और दिमाग के कामों में सुधार देखने को मिला. शोध में पाया गया कि इस स्प्रे का इस्तेमाल करने से चूहों में एंग्जायटी (चिंता), मानसिक गिरावट और मोटर स्किल्स में काफी सुधार हुआ. यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल नेचर न्यूरोसाइंस में प्रकाशित हुई है.
अल्जाइमर और स्ट्रोक में भी कारगर
फोरलुमैब नामक इस नाक में डालने वाले स्प्रे का विकास यूके की कंपनी टिजियाना ने किया है. इसे पहले मल्टीपल स्क्लेरोसिस और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के इलाज के लिए भी टेस्ट किया गया है. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह स्प्रे सिर्फ ब्रेन इंजरी ही नहीं, बल्कि इंट्रासेरेब्रल हेमरेज (दिमाग में ब्लीडिंग) और अन्य स्ट्रोक के मरीजों के लिए भी मददगार हो सकता है.
मरीजों के लिए उम्मीद की किरण
डॉ. सैफ इज्जी ने कहा कि आज भी ब्रेन इंजरी के मरीजों के लिए कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं है. लेकिन यह नई तकनीक विज्ञान पर आधारित एक ठोस समाधान प्रदान करती है. अब हमारा अगला टारगेट इसे प्री-क्लिनिकल मॉडल से इंसानों तक पहुंचाना है.
Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. आप कहीं भी कुछ भी अपनी सेहत से जुड़ा पढ़ें तो उसे अपनाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.