हरिद्वार, उज्जैन, प्रयागराज और नासिक में हर 3 साल में आयोजित होने वाला धार्मिक मेला कुंभ के नाम से जाना जाता है
हरिद्वार और प्रयागराज में हर 6 साल में होने वाले कुंभ को अर्धकुंभ कहा जाता है.
प्रयागराज में हर 144 साल में होने वाले विशेष आयोजन को महाकुंभ मेला कहा जाता है.
2025 के बाद अगला महाकुंभ 144 वर्षों बाद, यानी 2169 में प्रयागराज में होगा, जब एक बार फिर दुर्लभ खगोलीय संयोग बनेगा.
144 साल बाद होने वाला महाकुंभ तकनीकी और आध्यात्म का अनोखा संगम होगा, जिसमें एआई, वर्चुअल रियलिटी और स्पेस टूरिज्म के माध्यम से श्रद्धालु डिजिटल रूप से भी इसमें शामिल हो सकेंगे.
2169 तक गंगा संरक्षण और जल संकट प्रमुख विषय होंगे, और संभवतः स्नान के लिए संरक्षित जल स्रोतों का उपयोग किया जाएगा.
अगले महाकुंभ में दुनिया के कोने-कोने से श्रद्धालु, संत और योगी आएंगे, जिससे यह एक वैश्विक आध्यात्मिक सम्मेलन का रूप ले सकता है.
महाकुंभ हिंदू धर्म का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें संगम में स्नान मोक्ष का मार्ग माना जाता है. इसमें करोड़ों लोग पुण्य कमाने के लिए आते हैं.
यहां बताई गई सारी बातें विभिन्न स्रोतों से एकत्रित की गई हैं और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसकी विषय सामग्री और एआई द्वारा काल्पनिक चित्रण का जी यूपीयूके हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.