तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर है, जो समुद्र तल से 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यह सालभर बर्फ से ढका रहता है.
मान्यता है कि पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए इस मंदिर का निर्माण करवाया था. कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद पांडव उन्हें हिमालय की ओर चले गए थे.
ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम ने रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए इसी स्थान पर तपस्या की थी. इस कारण मंदिर के पास की चोटी को चंद्रशिला कहा जाता है.
स्थानीय मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए इसी स्थान पर कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए.
मंदिर पहुंचने के लिए पहले उखीमठ जाना होता है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा मंदाकिनी घाटी में प्रवेश किया जाता है. यहां से चोपता तक बस या टैक्सी से पहुंचकर 3 किलोमीटर की ट्रेकिंग करनी पड़ती है.
नवंबर से फरवरी तक यह इलाका भारी बर्फबारी के कारण सफेद चादर में ढक जाता है, इस दौरान मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं और भगवान शिव की पूजा मक्कूमठ में होती है.
जुलाई से अक्टूबर तक यहां की खूबसूरती अपने चरम पर होती है इन महीनों में चारों ओर हरियाली और बुरांश के लाल फूल मंदिर के आसपास खिले रहते हैं.
पंच केदारों में से एक होने के कारण तुंगनाथ मंदिर शिव भक्तों के लिए बेहद पवित्र स्थल माना जाता है. हर साल हजारों श्रद्धालु यहां भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं.
यह मंदिर आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कराता है. यहां से हिमालय की ऊंची चोटियां, नंदा देवी और त्रिशूल पर्वत के अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं.
यह जानकारी विभिन्न स्रोतों से एकत्रित की गई है और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसकी विषय सामग्री की जी यूपीयूके पुष्टि नहीं करता.