कौन हैं बनारस की तीन सगी बहनें, जिन्होंने रुकवाया पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट, मांगे 32 करोड़ रुपये
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कौन हैं बनारस की तीन सगी बहनें, जिन्होंने रुकवाया पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट, मांगे 32 करोड़ रुपये

Varanasi Ropeway Stay In High Court: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में बनने वाले रोपवे के निर्माण में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया है. आइए जानते हैं  कि इनको क्यों रोका गया है, इस मामले में क्या कह रहा है वाराणसी विकास प्राधिकरण.... 

 

Varanasi News

Varanasi Ropeway Project Stay News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट वाराणसी रोपवे पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश दिया है. यह फैसला वाराणसी की तीन बहनों मंशा सिंह, सुचित्रा सिंह और प्रतिमा सिंह की याचिका पर आया, जिनका दावा है कि उनकी संपत्ति का न तो उचित अधिग्रहण हुआ और न ही उन्हें मुआवजा मिला. 

रोपवे प्रोजेक्ट क्यों बना विवाद का विषय?
स्विट्जरलैंड की एक कंपनी की देखरेख में बन रहे इस रोपवे का निर्माण नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) कर रही है. इसे अगले तीन महीनों में शुरू करने की योजना थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 15 अप्रैल तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है. विवाद मुख्य रूप से पिलर नंबर 29 को लेकर है, जो गोदौलिया इलाके में स्थित है. तीनों बहनों का कहना है कि उनकी फ्री होल्ड संपत्ति को बिना अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी किए गिरा दिया गया, और उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया गया.

क्या कह रहा वाराणसी विकास प्राधिकरण?
वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) का कहना है कि वह तीनों बहनों को 6 करोड़ रुपये मुआवजा देने को तैयार है, लेकिन वे मार्केट रेट के हिसाब से 32 करोड़ रुपये की मांग कर रही हैं. VDA के उपाध्यक्ष  ने कहा कि सभी नियमों का पालन किया गया है, लेकिन मामला मुआवजे की रकम को बढ़ाने का है.

तीन बहनों का पक्ष
सुचित्रा सिंह का कहना है कि यह संपत्ति उनके पिता और भाइयों ने उन्हें उपहार में दी थी ताकि वे भविष्य में इसका उपयोग कर सकें. उनका दावा है कि 4083 स्क्वायर फीट जमीन के लिए उन्हें या तो बराबर की जमीन दी जाए या फिर बाजार मूल्य के अनुसार 32 करोड़ रुपये का मुआवजा मिले. 

क्या होगा रोपवे प्रोजेक्ट का भविष्य?
अब सवाल यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या फैसला देगा. क्या रोपवे प्रोजेक्ट केवल पिलर नंबर 29 तक ही रुकेगा, या फिर पूरा प्रोजेक्ट प्रभावित होगा? 15 अप्रैल को होने वाली सुनवाई से इस पर स्थिति साफ हो सकेगी.

रोपवे प्रोजेक्ट का महत्व
बनारस में ट्रैफिक जाम एक बड़ी समस्या है. यह रोपवे पर्यटन और ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. इस पर 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के विकास के लिए यह प्रोजेक्ट जरूरी है और इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए.अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट के 15 अप्रैल के फैसले पर टिकी हैं, जो इस प्रोजेक्ट का भविष्य तय करेगा.

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