UP News: उत्तर प्रदेश को आखिर 3 साल बाद स्थाई डीजीपी मिलने की उम्मीद जग गई है. एक तरफ यह मामला जहां सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दे चुका है तो वहीं केंद्र सरकार ने यूपी सरकार को चिट्ठी लिख वो प्रोपजल मांगा है जो यूपीएससी को भेजा गया था.
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UP DGP News: उत्तर प्रदेश को जल्द ही स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने की उम्मीद एक बार फिर से जागी है. केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने यूपी सरकार से उन दस्तावेजों की मांग की है, जो डीजीपी नियुक्ति के लिए संघ लोकसेवा आयोग (UPSC) को भेजे गए थे. न केवल यूपी, बल्कि उन सभी राज्यों से भी यह जानकारी मांगी गई है जहां अभी तक स्थायी डीजीपी की नियुक्ति नहीं हुई है.
केंद्र सरकार के अंडर सेक्रेटरी संजीव कुमार की ओर से यूपी, पंजाब, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और झारखंड के मुख्य सचिवों को पत्र भेजा गया है. इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि डीजीपी की नियुक्ति से जुड़े सभी प्रस्तावों की प्रति UPSC के साथ-साथ गृह मंत्रालय को भी भेजी जाए. मंत्रालय का कहना है कि राज्य सरकारें यह जानकारी केवल UPSC को भेज रही थीं, जबकि उसे केंद्र सरकार के साथ साझा करना जरूरी है.
यूपी में 3 साल से कार्यवाहक डीजीपी का दौर
उत्तर प्रदेश में मई 2022 से अब तक कोई स्थायी डीजीपी नहीं है. पूर्व डीजीपी मुकुल गोयल को 11 मई 2022 को पद से हटाने के बाद से लगातार कार्यवाहक डीजीपी ही बनाए जा रहे हैं.
- मुकुल गोयल के बाद देवेंद्र सिंह चौहान कार्यवाहक डीजीपी बने (31 मार्च 2023 तक).
- उनके बाद राजकुमार विश्वकर्मा को यह जिम्मेदारी दी गई, लेकिन वे भी रिटायर हो गए.
- विजय कुमार को कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया, पर 31 जनवरी 2024 को वे भी रिटायर हो गए.
- अब प्रशांत कुमार कार्यवाहक डीजीपी के रूप में काम कर रहे हैं.
सुप्रीम कोर्ट में 25 मार्च को सुनवाई
यूपी समेत छह राज्यों में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति न होने के कारण सुप्रीम कोर्ट में अवमानना का मामला चल रहा है. अधिवक्ता सावित्री पांडेय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने UPSC को निर्देश दिया था कि वह डीजीपी चयन प्रक्रिया जारी रखे. कोर्ट ने यूपी सरकार से स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है, जिसकी सुनवाई 25 मार्च को होनी है.
विधानसभा में भी उठा सवाल
24 फरवरी को विधानसभा में विपक्ष ने यूपी में स्थायी डीजीपी न होने का मुद्दा उठाया. नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार से पूछा कि आखिर डीजीपी की नियुक्ति को लटकाने का कारण क्या है? उन्होंने कहा, “अगर स्थायी डीजीपी बन गया, तो सरकार उसे दो साल तक हटा नहीं सकेगी, जिससे पुलिस प्रशासन निष्पक्ष तरीके से काम करेगा.”
नवंबर में बनी नियमावली, पर अमल नहीं
यूपी सरकार ने नवंबर 2024 में डीजीपी की नियुक्ति को लेकर एक नियमावली बनाई थी. इसके तहत चयन प्रक्रिया एक कमेटी के जरिए होनी थी, और न्यूनतम सेवा शेष रहने की अवधि छह महीने तय की गई थी. लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
अब सवाल यह है कि क्या सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और केंद्र सरकार की सख्ती के बाद यूपी को स्थायी डीजीपी मिलेगा, या कार्यवाहक डीजीपी का यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा?