Jaipur News: अमेरिका की 50 वर्षीय साध्वी सूखा ने लग्जरी जीवन छोड़ आध्यात्मिक शांति की तलाश में भारत का रुख किया. वे बहरोड़ के जखराना गांव की पहाड़ियों में अन्न-जल त्यागकर मौन साधना कर रही हैं. ग्रामीणों की जिज्ञासा से बाधित होकर वे 28 फरवरी के बाद नया स्थान तलाशेंगी.
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Rajasthan News: बहरोड़ उपखंड क्षेत्र के जखराना गांव की पहाड़ियों में एक अनूठी साधना देखने को मिल रही है. अमेरिका की 50 वर्षीय महिला, जो कभी वहां की आरामदायक और लग्जरी जीवनशैली का हिस्सा थीं, अब आध्यात्मिक शांति की तलाश में भारत के जंगलों में तपस्या कर रही हैं. पिछले पांच वर्षों से भारत में रहने वाली यह साध्वी 'सूखा' अब पूरी तरह मौन धारण कर कठिन तप में लीन हैं.
सूखा अन्न-जल त्याग कर कर रही हैं साधना
बीते एक सप्ताह से साध्वी सूखा ने अन्न और जल का पूरी तरह त्याग कर दिया है. वे केवल वायु और सूर्य किरणों के माध्यम से ऊर्जा प्राप्त कर रही हैं. हालांकि, बहुत ही कम मात्रा में पानी ग्रहण करती हैं. ग्रामीणों द्वारा भोजन और दूध लाने के बावजूद, उन्होंने बिना बोले इशारों में ही लेने से मना कर दिया.
आचार्य प्रद्युम्न महाराज की शिष्या हैं साध्वी
अमेरिका से भारत पहुंची साध्वी सूखा कर्नाटक से आई हैं. वे नारनौल के आर्ष गुरुकुल खानपुर के आचार्य प्रद्युम्न महाराज की शिष्या हैं, जो स्वयं योगगुरु बाबा रामदेव के गुरु भी रहे हैं. बताया जा रहा है कि कर्नाटक के जंगलों में उनकी तपस्या में व्यवधान उत्पन्न हो गया था, जिसके बाद प्रद्युम्न महाराज के निर्देश पर वे जखराना गांव आईं.
जल्द बदलेंगी स्थान
ग्रामीणों की उत्सुकता उनकी साधना में बाधा बन रही है, जिसके कारण वे 28 फरवरी के बाद किसी अन्य स्थान पर तपस्या के लिए प्रस्थान करेंगी. अमेरिका निवासी शेखर अग्रवाल, जो प्रद्युम्न महाराज के शिष्य हैं, साध्वी से मिलने पहुंचे और बताया कि वे भारत में कई वर्षों से कठोर तपस्या कर रही हैं.
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