Kanifnath Mela Muslim Entry Ban: महाराष्ट्र का कानिफनाथ मेला इस बार परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के बजाय एक नए विवाद के कारण सुर्खियों में है.
Trending Photos
Kanifnath Mela Muslim Entry Ban: महाराष्ट्र का कानिफनाथ मेला इस बार परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के बजाय एक नए विवाद के कारण सुर्खियों में है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह एक सनातनी मेला है जिसमें केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश मिलना चाहिए जो इसकी परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हैं. इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है और अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है. असदुद्दीन ओवैसी ने इसे संविधान का उल्लंघन बताया है, जिससे मामला और गरमा गया है.
कानिफनाथ मेले में क्या हो रहा है विवाद?
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित कानिफनाथ महाराज मंदिर हर साल हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. सदियों से यहां मढ़ी गांव में एक विशाल मेला लगता आ रहा है. लेकिन इस साल कुछ स्थानीय लोगों और संतों की ओर से यह मांग उठाई गई कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को मेले में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. उनका तर्क है कि मेले में आने वाले सभी लोगों को इसके धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए. लेकिन मुस्लिम व्यापारी और श्रद्धालु इन परंपराओं का सम्मान नहीं करते.
स्थानीय सरपंच और संतों की राय
इस विवाद पर स्थानीय सरपंच और संतों का कहना है कि कानिफनाथ मेला सनातन धर्म से जुड़ा हुआ है और इसकी अपनी परंपराएं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मुस्लिम दुकानदार और श्रद्धालु इन परंपराओं का पालन नहीं करते. जिससे धार्मिक भावना आहत होती है. इसी आधार पर मेले में उनकी एंट्री पर रोक लगाने की मांग की गई.
मुस्लिम समुदाय का विरोध
जो मुस्लिम व्यापारी और श्रद्धालु वर्षों से इस मेले का हिस्सा रहे हैं. वे इस फैसले को नाइंसाफी मान रहे हैं. उनका कहना है कि वे लंबे समय से इस मेले में दुकानें लगाते आ रहे हैं और कभी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा. लेकिन इस बार कुछ संगठनों द्वारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है.
असदुद्दीन ओवैसी ने क्या कहा?
इस विवाद में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट करते हुए इस फैसले की कड़ी निंदा की. ओवैसी ने इसे संविधान के अनुच्छेद 17 का उल्लंघन बताया और कहा कि यह सामाजिक बहिष्कार की श्रेणी में आता है. उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि अगर धार्मिक मान्यताओं का पालन ही एंट्री की शर्त है, तो यह नियम सभी पर समान रूप से क्यों लागू नहीं किया जाता?
प्रशासन का रुख क्या है?
स्थानीय प्रशासन इस विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहा है. अधिकारी ऐसा समाधान चाहते हैं जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हों और मेले की परंपरा भी बनी रहे. हालांकि, ओवैसी के हस्तक्षेप के बाद मामला और पेचीदा हो गया है और अब यह राजनीतिक रंग लेने लगा है.
महाकुंभ से कानिफनाथ मेला तक: एक समान विवाद
यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक आयोजन में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर विवाद हुआ हो. इससे पहले महाकुंभ में भी कुछ साधु-संतों ने मुस्लिमों के प्रवेश पर सवाल उठाए थे. हालांकि, इसी महाकुंभ से एक सकारात्मक कहानी भी सामने आई. प्रयागराज के रहने वाले शराफत नाम के चाय विक्रेता ने बताया कि उन्होंने कुंभ के दौरान रोजाना 20 हजार रुपये की चाय बेची और 44 दिनों में करीब 9 लाख रुपये कमाए.