किसने बनाया भोपाल को MP की राजधानी, भोजपाल से आधुनिक राजधानी तक का दिलचस्प है सफर
आधुनिक और विकसित शहर
भारत का ह्रदय कहलाने वाला भोपाल आज एक आधुनिक और विकसित शहर है.
भोपाल हर क्षेत्र में सफल
चाहे बात एजुकेशन की हो मेडिकल की या फिर कनैक्टिविटी की, भोपाल इन सभी सेक्टर में विकसित है. जिसकी वजह से भोपाल आज भारत का महत्वपूर्ण गण माना जाता है.
एमपी की राजधानी बनने तक का सफर
एमपी की राजधानी भोपाल का इतिहास काफी पुराना है. आपको इसके सफर के बारे में जान कर काफी हैरानी होगी.
भोपाल का नाम
भोपाल का नाम भोजपाल से लिया गया है, जो धार के परमार शासक राजा भोज के नाम पर है.
भोपाल की स्थापना
कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसकी स्थापना गोंड राजा भूपाल शाह ने की थी.
महाकौतार
शुरुआत में यह क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ियों से भरा था, जिसे महाकौतार कहा जाता था.
राजा भोज
बताया जाता है कि 10वीं शताब्दी में यहां राजपूत वंशों का शासन शुरू हुआ था जिनमें राजा भोज प्रमुख शासक थे.
गोंड साम्राज्य
14वीं शताब्दी में भोपाल गोंड साम्राज्य का हिस्सा बना.
मोहम्मद खान
गोंड राजा के मृत्यु के बाद उनकी विधवा रानी कमलावती ने दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी थी.
भोपाल राज्य की नींव
मोहम्मद खान ने धोखे से गिन्नौर किले पर कब्जा कर भोपाल राज्य की नींव डाली थी.
भोपाल बना राजधानी
1722 में मोहम्मद खान ने भोपाल को अपनी राजधानी बनाया जिसके बाद से 1819 से 1926 तक भोपाल पर बेगमों का शासन रहा.
1947 के बाद, भोपाल को मध्य प्रदेश की राजधानी बनाने का फैसला लिया गया.
राज्य का गठन
1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश राज्य का गठन हुआ और भोपाल को इसकी राजधानी घोषित किया गया था.