AI in Judiciary: डिजिटल युग में न्याय व्यवस्था कैसे मजबूत हो? पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने सुझाए समाधान
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AI in Judiciary: डिजिटल युग में न्याय व्यवस्था कैसे मजबूत हो? पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने सुझाए समाधान

Legal System and AI: पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने न्याय प्रणाली में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर अहम बातें साझा कीं.

AI in Judiciary: डिजिटल युग में न्याय व्यवस्था कैसे मजबूत हो? पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने सुझाए समाधान

Legal System and AI: पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी.वाई. चंद्रचूड़ ने न्याय प्रणाली में डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग पर अहम बातें साझा कीं. उन्होंने कहा कि वर्चुअल अदालतों ने न्याय प्रक्रिया को सरल बनाया है, लेकिन इससे निष्पक्ष सुनवाई और डेटा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं भी उभरी हैं.

वर्चुअल अदालतों से सुविधा लेकिन निष्पक्षता बनी चुनौती

मुंबई में वेलिंगकर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के एक सम्मेलन में बोलते हुए. पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि वर्चुअल अदालतों ने आम लोगों के लिए न्याय तक पहुंच को आसान बनाया है. हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल सुनवाई के चलते निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और डेटा सुरक्षा को लेकर चुनौतियां बढ़ रही हैं. उन्होंने कहा कि नवाचार और न्यायिक सत्यनिष्ठा के बीच संतुलन जरूरी है. यदि न्यायिक प्रक्रिया में निष्पक्षता, जवाबदेही और विश्वास नहीं होगा तो दक्षता का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा.

क्या एआई मानव निर्णय लेने की जगह ले सकता है?

पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने इस बात को स्वीकार किया कि एआई ने मुकदमों के प्रबंधन और कानूनी प्रक्रियाओं को तेज और अधिक कुशल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि मशीनें केवल सहायता कर सकती हैं वे मानव निर्णय की जगह नहीं ले सकतीं. उन्होंने कहा कि एआई डेटा का विश्लेषण कर सकता है. कानूनी दस्तावेज तैयार कर सकता है. लेकिन एक न्यायाधीश का काम केवल तर्कों का विश्लेषण करना नहीं है. निर्णय लेने में मानवीय संवेदनशीलता और नैतिकता का होना जरूरी है. जिसे एआई कभी भी पूरी तरह आत्मसात नहीं कर सकता.

हाशिए पर मौजूद वर्गों को अवसर मिलना जरूरी

चंद्रचूड़ ने सामाजिक न्याय और समान अवसरों की जरूरत पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाएं और अल्पसंख्यक अब भी कई सामाजिक और आर्थिक बाधाओं का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व की भूमिकाओं तक सभी की समान पहुंच होनी चाहिए. विविधता को बढ़ावा देना और अन्याय को खत्म करने के लिए सकारात्मक नीतियां आवश्यक हैं.

डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और एआई के लिए सख्त कानून जरूरी

चंद्रचूड़ ने डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा और एआई के जवाबदेही नियमों को मजबूत करने की जरूरत पर बल दिया. उन्होंने कहा  कि हमने तकनीक के जरिए अपने भविष्य को सुधारने की कोशिश की है लेकिन यह हमारे लिए खतरे भी पैदा कर रही है. उन्होंने सुझाव दिया कि एक स्मार्ट कानूनी ढांचा तैयार किया जाए जो नवाचारों को खत्म किए बिना उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे. उन्होंने कहा कि हमें ऐसे कानूनों की जरूरत है जो एआई की जवाबदेही तय करें और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने के लिए साइबर सुरक्षा नियमों को सख्त बनाएं.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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