Bihar Politics: क्या बिहार चुनाव में हावी होगा जातिवाद? सर्वे के नतीजों ने तो सभी को चौंका दिया
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Bihar Politics: क्या बिहार चुनाव में हावी होगा जातिवाद? सर्वे के नतीजों ने तो सभी को चौंका दिया

Bihar Politics: सियासी जानकार कहते हैं कि बिहार की राजनीति जातिवाद आधारित है जिसको लेकर हर दल सभी जातियों को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला करते हैं. क्या प्रदेश की राजनीति में अभी भी जातिवाद मौजूद है. इसको लेकर चुनाव आयोग की एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

प्रतीकात्मक

Bihar Politics: बिहार की राजनीति में जाति की बात ना हो, ये नहीं हो सकता है. कहते हैं कि बिहार की राजनीति जातिवाद आधारित है जिसको लेकर हर दल सभी जातियों को ध्यान में रखते हुए ही कोई फैसला करते हैं. चुनाव से पहले सभी दलों की ओर से जातीय किलेबंदी का दुरुस्तीकरण शुरू हो गया है. कांग्रेस हो भाजपा, जेडीयू हो या राजद, सभी दल अपने-अपने कोर वोटर को साधने के साथ-साथ विरोधी खेमे के वोटबैंक में सेंधमारी की योजना तैयार कर रहे हैं. बुधवार (26 फरवरी) को हुए कैबिनेट विस्तार को इसी का हिस्सा माना जा रहा है. अब सवाल ये है कि क्या बिहार में अभी जातिवाद हावी रहता है? इसको लेकर चुनाव आयोग ने पिछले साल जून में एक सर्वे किया था, जिसकी रिपोर्ट काफी चौंकाने वाली है.

चुनाव आयोग ने 2024 में हुए लोकसभा चुनाव के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में जाति और धर्म के आधार पर वोट करने वालों की संख्या काफी कम है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 4.2 फीसदी लोगों ने प्रत्याशी की जाति के आधार पर वोट किया था. प्रत्याशी के धर्म के आधार पर वोट करने वालों की संख्या महज 1.1 फीसदी है. प्रदेश में 32.2 फीसदी लोग ऐसे हैं, जो किसी ना किसी दल के समर्थक हैं और पार्टी के कैंडिडेट को ही वोट किया था. 33.9 फीसदी लोगों ने प्रत्याशी के चुनाव प्रचार के आधार पर उनको वोट दिया था. आसान भाषा में कहें तो प्रत्याशी या उनके प्रतिनिधि ने वोट मांगा था, इसलिए उन्हें वोट दिया था. सबसे ज्यादा 41.4 फीसदी लोगों ने परिवार की राय के आधार पर वोट किया था.

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चुनावी साल में एनडीए सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार किया गया, जिसमें बीजेपी के 7 विधायक मंत्री बने. हालांकि, बीजेपी ने इस बार भी मुस्लिम दलित और यादव को मंत्रिमंडल में जगह नहीं दी है. जबकि प्रदेश में यादवों की आबादी सबसे ज्यादा 14.26 फीसदी है. 2020 के विधानसभा चुनाव में यादव जाति से 52 विधायक बने थे.  इसमें सबसे ज्यादा आरजेडी से 35, बीजेपी से 8, जेडीयू से 7, लेफ्ट से 3 और कांग्रेस से एक यादव विधायक है. इस तरह से राजद के बाद बीजेपी के पास सबसे ज्यादा यादव विधायक हैं. फिर भी बीजेपी ने एक भी यादव विधायक को मंत्री नहीं बनाया. सियासी जानकारों का कहना है कि यादव और मुस्लिम को राजद का कोर वोटर माना जाता है.  बीजेपी ने साफ संदेश दिया है जो हमारे साथ नहीं हम उसके साथ नहीं.

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